भारत देश के चिकित्सक, वकील एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मिलकर बनाया एक्शन प्लान

!! भारत देश के चिकित्सक, वकील एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मिलकर बनाया एक्शन प्लान !!

आपकी जय !

1 दिनांक 16 व 17 फरवरी, 2018 को “आदिवासी एकता परिषद” एवं “आदिवासी समन्वय मंच, भारत” के संयुक्त तत्वाधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर का चिकित्सक, वकील एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं का चिंतन शिविर “इंडियन सोशियल इंस्टीट्यूट” (ISI),10 इंस्टीट्युशनल एरिया, लोधी रोड़,नई दिल्ली मे संपन्न हुआ।

2 शिविर का शीर्षक था “Adivasi Health and Sustainable Healthcare”
&
“Constitutional Rights and Customary Modes of dispute resolution By, for and of the Adivasi”

3. सेमिनार की शुरुआत आदिवासी परंपरानुसार पूर्वज एवं प्रकृति की पूजा अर्चना एवं धरती वंदना गाकर की गई ।

4.सेमिनार में विशेष अतिथि के रुप में आप फूलमन चौधरी (नेपाल), उपाध्यक्ष, “यूएन परमानेंट फोरम ऑन इंडियन इश्यूज थे ।

5.निकोलस बारला जी, उड़ीसा के द्वारा सेमिनार की भूमिका रखते हुए सभी आगुंतकों का शब्दों से स्वागत किया गया ।

6.सेमिनार का प्रथम सत्र -National level adivasi health status : a concern for our future. इस सत्र की अध्यक्षता विश्वनाथ तिर्की, General manager,BHEL,Ranchi द्वारा की गई । इस विषय पर डॉक्टर शांतिकर वसावा, गुजरात द्वारा विस्तृत से देशभर के आदिवासियों के स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में बात रखी गई ।

7.दूसरा सत्र – State wise tribal health status. इस सत्र की अध्यक्षता डॉक्टर सुरेश चौधरी,गुजरात एवम डॉ गोविंद मुजाल्दा,मध्यप्रदेश द्वारा की गई । डॉ मोहन सुलिया- मध्य प्रदेश, डॉ सुनील पराड़- महाराष्ट्र, डॉक्टर असीमराज केरकेट्टा- झारखंड, डेविड बुरूड़ी- आंध्र प्रदेश,डा. अभय खाखा -छत्तीसगढ़, डॉ पीयूष मुंडे -उड़ीसा ,डॉ लालसिंह चंदाना -गुजरात, गंगाराम गेगराई- दिल्ली आदि के द्वारा अपने-अपने राज्यों मे आदिवासियों की स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में विस्तृत से बात रखी गई ।

8.तीसरा सत्र -Sickle cell: special concern among adivasi society. इस सत्र की अध्यक्षता डॉक्टर प्रदीप गरासिया गुजरात द्वारा की गई । इस विषय पर डॉक्टर हितेश मुजाल्दे द्वारा सिकलसेल को लेकर समाज एवं हमारे डॉक्टर की जागरूकता को लेकर विस्तृत से बात रखी । इसके साथ ही डॉक्टर अश्विन वसावा, गुजरात के द्वारा पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से सिकलसेल जैसी गंभीर बीमारी के बारे में बात रखी । डॉक्टर रमेश चंद्र मुवेल साहब मध्य प्रदेश के द्वारा सिकलसेल का आयुर्वेद में इलाज के बारे में बात रखी ।

9.चौथा सत्र -Mal Nutrition tribals and related diseases. At the end clarification. इस सत्र की अध्यक्षता डॉ मोहन सुलिया, मध्य प्रदेश द्वारा की गई । इस विषय पर डॉ राजेश वलवी, महाराष्ट्र द्वारा पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले को थीम में रखते हुए पूरे देश के आदिवासियों के कुपोषण के कारण, प्रभाव एवं उसके रोकथाम के उपाय आदि पर विस्तृत रुप से अपनी बात रखी ।

10.पांचवा सत्र- United Nations permanent forum on indigenous issues (UNPFIi). इस सत्र की अध्यक्षता अशोक भाई चौधरी, महासचिव, आदिवासी एकता परिषद के द्वारा की गई एवं फूल मन चौधरी साहब द्वारा विशेष वक्ता के रूप में विषय पर बात रखी गई ।

11.छठवां सत्र -Ethno medicine and tribal health,Hodopathy, herbs age effective and life saving medicines. इस सत्र की अध्यक्षता डॉक्टर लालसिंह चंदाना, गुजरात द्वारा की गई एवं इस विषय पर डॉक्टर वासवी कीड़ों,झारखंड, वैद्य पीयूष मुंडा, वैद्य मानसी मुंडा, वैद्य रोहित गोमांगो द्वारा सारगर्भित एवं उपयोगी आदिवासियों के पारंपरिक इलाज, दवाइयां ,जड़ी बूटियां आदि पर बात रखी गई।

12.सेमिनार का दूसरा दिन: 17 फरवरी, 2018, पहला सत्र – Scheduled Tribes : A Betrayed citizen of India. Non implementation of laws, governance, Act in schedule areas and tribal areas. इस सत्र की अध्यक्षता एडवोकेट सुमित्रा बहन वसावा द्वारा की गई एवं विषय पर बात एडवोकेट निकोलस बारला जी द्वारा रखी गई ।

13.दूसरा सत्र – Action Plan State and National Level. इस सत्र की अध्यक्षता अशोक भाई चौधरी , महासचिव, आदिवासी एकता परिषद द्वारा की गई एवं यह सत्र राउंड चेयर मे सामूहिक चर्चा करते हुए संपादित किया । दिनांक 16 फरवरी, 2018 को तीन अलग-अलग ग्रुपों में डॉक्टर्स ,वकील व सामाजिक कार्यकर्ता,आदिवासी मेडिसिन, इथनो मेडिसिन होड़ोपेथी पर चर्चा की थी । उसे प्रस्तुत किया गया ।

14 . इस दरमियान सेमिनार में आज शामिल हुए बोडोलैंड के प्रमोद बोरो , राजू बोरो, उड़ीसा आद्या गोमांगो आदि के द्वारा सेमिनार को संबोधित किया गया ।

15.  डॉक्टरों की समूह चर्चा की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए डॉ राजेश वलवी महाराष्ट्र द्वारा डॉक्टरों का एक्शन प्लान प्रस्तुत किया गया। जिसके तहत राष्ट्रीय स्तर पर डॉक्टरों का एक सेल “National Indigenous Health Forum” के नाम से गठित किया गया । जिसके दो राष्ट्रीय संयोजक डॉ राजेश वलवी, डॉक्टर सुनील पराड़ तथा दो दो राज्य स्तर के संयोजक नियुक्त किए गए ।जिसमे मध्य प्रदेश से डॉक्टर गोविंद मुजाल्दे, डॉक्टर रमेश चंद्र मूवेल, गुजरात से डाक्टर डेक्सटर पटेल, डॉक्टर रितेश चौधरी, झारखंड से डॉ असीमराज केरकेट्टा, डॉ लियो मिंकन खोया आदि को नियुक्त किया गया । शेष राज्यों के दो-दो कोर्डिनेटर उन राज्य के डॉक्टर्स से संपर्क कर नियुक्त किए जाएंगे। इस सेल अगली बैठक 3 माह पश्चात् की जाएगी । सेल के द्वारा कुपोषण एवं सिकलसेल जैसी गंभीर बीमारियों पर कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा । आदिवासी मेडिसिन पर रिसर्च का कार्य किया जाएगा देशभर के चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े हुए सभी लोगों को इस फोरम से जोड़ा जाएगा एवं आदिवासियों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए कार्य किया जाएगा । निशुल्क स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन देश के अलग अलग राज्यों मे किये जायेंगे । आदिवासी विद्यार्थियों को मेडिकल एजुकेशन मे आ रही समस्या पर कार्य किया जाएगा ।

16. आदिवासी मेडिसिन, जड़ी बूटियां आदि पर एक्शन प्लान डॉक्टर वासवी द्वारा रखा गया । जिसमें इन मेडिसिन पर शोध कार्य करना और उसे आगे बढ़ाना जैसे कई महत्वपूर्ण शार्ट टर्म व लॉन्ग टर्म को लेकर एक्शन प्लान प्रस्तुत किए गए ।

17.लीगल फील्ड ग्रुप में जो चर्चा की गई उसका निष्कर्ष एडवोकेट सुमित्रा बहन वसावा द्वारा प्रस्तुत किया गया । जिसके तहत राष्ट्रीय स्तर पर लीगल सेल बनाकर उसका विस्तार राज्य, जिला व तहसील स्तर पर किया जाएगा । राष्ट्रीय आदिवासी लीगल सेल के कोआर्डिनेशन का कार्य एडवोकेट निकोलस बारला, उड़ीसा, एडवोकेट विक्रम पर्ते, मध्य प्रदेश, एडवोकेट सेवंती बहन, छत्तीसगढ़ ,एडवोकेट सुमित्रा वसावा, गुजरात, एडवोकेट कृपाशंकर भगत छत्तीसगढ़ के द्वारा किया जाएगा । अगले महीने पुनः एडवोकेट इस सेल को लेकर मीटिंग का आयोजन करेंगे । 15 अप्रैल तक देश में आदिवासियों संवैधानिक प्रावधान व कानूनों आदि के होने के बावजूद भी उन पर हो रहे अन्याय ,अत्याचार, शोषण व दमन के आंकड़े इकट्ठे किए जाएंगे । जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद स्थापित किया जाएगा । लॉ कॉलेज के छात्रों के साथ संवाद स्थापित किया जाएगा । गांव में जाकर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा । माननीय सुप्रीम कोर्ट के द्वारा आदिवासियों को लेकर सुनाए गए फैसलों का हिंदी में अनुवाद करवाया जाएगा।
13 सितंबर 2018 को यूनो द्वारा घोषित “आदिवासी अधिकार का घोषणा दिवस” झारखंड राज्य के रांची में आदिवासी समन्वय मंच, भारत के बैनर तले मनाया जाएगा।
15 नवंबर को क्रांतिकारी महापुरुष बिरसा मुंडा की जयंती को पूरे देश में “युवा दिवस” के रूप में मनाया जाएगा।
पूरे देश में आदिवासी जन जाग्रति हेतु यात्रा का आयोजन किया जाएगा ।
आदिवासियों की इश्यूज को लेकर राष्ट्रपति से प्रतिनिधिमंडल मिलेगा ।
आदिवासी समन्वय मंच, भारत के माध्यम से देश के अलग-अलग क्षेत्र में चल रहे आदिवासी आंदोलनों एवं संगठनों के साथ संवाद स्थापित करते हुए उन्हें आदिवासियों के कामन मुद्दों को लेकर एक मंच पर लाया जाएगा ।
सेमिनार मे यूनो के प्रतिनिधि, पूर्वोत्तर राज्यों के प्रतिनिधि सहित 9 राज्यों के आदिवासी प्रतिनिधि उपस्थित हुए । सेमिनार में लगभग 40 से 50 डॉक्टरों सहित वकील एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित हुए ।
सेमिनार में सभी विषयों पर गंभीरता से चर्चा की गई जिसका संपूर्ण वर्णन सोशल मीडिया पर नहीं किया जा सकता है । किंतु यह आदिवासियों के भविष्य के लिए एक सार्थक पहल की गई।
सेमिनार में आए हुए यूएन के प्रतिनिधि आप फुलमन चौधरी एवं अन्य राज्यों की प्रतिनिधियों द्वारा द्वारा आदिवासी एकता परिषद के राजपिपला महासम्मेलन कि सराहना की गई ।
इस सेमिनार के सफल आयोजन करने में जिन जिन कार्यकर्ताओं ने प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रुप से योगदान दिया उनका हम तहे दिल से शुक्रिया अदा एवं आभार व्यक्त करते हैं

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